![]() |
| Written by :Rajesh Kondal |
अपनी ही तमन्नाओ से
अपनी ही ख्वाइशो से
परेशां हु मै
फिर भी जाने क्यों
इस जिंदगी पे इतना मेहरबान हु मै,,,,
आज तक तो हर कदम हम साथ चले जिंदगी के
सुख और दुःख में भी थामे हाथ चले जिंदगी के
हर पल इसे सीने से लगाये रखा
हर किसी से छुपाये रखा
फिर जाने क्यों आज एसा लगा
शायद नादान हु मै,,,,,,
जिंदगी कुछ नहीं बस जुस्तजू का रंग है
हर बकत चलती हुई मोत से एक जंग है
कभी सुखो का दरिया है ये
कभी मोत का जरिया है ये
इसके इतना करीब होते हुया भी
कितना अंजान हु मै,,,,,,,,
"राजेश कोंडल"

No comments:
Post a Comment