Tuesday, April 9, 2013

अपनी ही तमन्नाओ से,,,,,,,,,

Written by :Rajesh Kondal



अपनी ही तमन्नाओ से

अपनी ही ख्वाइशो  से

परेशां हु मै

फिर भी जाने क्यों

इस जिंदगी पे इतना मेहरबान हु मै,,,,

आज तक तो हर कदम हम साथ चले जिंदगी के

सुख और दुःख में भी थामे हाथ चले जिंदगी के

हर पल इसे सीने से लगाये रखा 

हर किसी से छुपाये रखा

फिर जाने क्यों आज एसा लगा

शायद नादान हु मै,,,,,,

जिंदगी कुछ नहीं बस जुस्तजू का रंग है

हर बकत चलती हुई मोत से एक जंग है

कभी सुखो का दरिया है ये

कभी मोत का जरिया है ये 

इसके इतना करीब होते हुया भी

कितना अंजान हु मै,,,,,,,,


                                                    "राजेश कोंडल"

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