Sunday, January 20, 2013

चाहते दिल में,,,,,,,,,,,,

Written by: Rajesh Kondal


चाहते दिल में आती जाती रहती है

जाने क्यों दिल को सताती रहती है


शमा रोशन करती है घरो को

मगर परवानो को जलती रहती है


नदी किसी के रोकने से नहीं रुकती

हर दिन नए रस्ते बनती रहती है


समुंदर की लहरे आकार साहिल पर

कदमो के निशा मिटती रहती है


कुछ लोग हमें छोड़ कर चले जाते है

पर उनकी यादे हमको रुलाती रहती है


राजेश कोंडल

No comments: