Monday, October 29, 2012

काश ! अगर मै एक पेड़ होता ,,,,,

न चलता , न फिरता

न कुछ पाने की चाह में

इधर उधर भटकता

दिन भर खेलता हवाओ संग

रात भर पक्षियों के साथ

गहरी नींद सोता,,,,,,
काश ! अगर मै एक पेड़ होता ,,,,,


कोयल मेरी छाया मे बैठ क़ूह - क़ूह करती

कभी कोई गिलहरी मेरे बदन पर गुदगुदी करती

पाने को मेरे मीठे फल,कोई अपने आंगन मे

मेरा बीज बोता,,,,काश ! अगर मै एक पेड़ होता ,,,,,


पक्षी बनाते अपने घोसले मेरी बाहों पर 

लगाते लोग मुझे छाया के लिए राहों पर

सुनता मै सभी की मगर किसी से कुछ न कहता

फिर भी गर कोई कiटता मुझे ,,,,,,,

तब शायद मै भी रोताकाश ! अगर मै एक पेड़ होता ,,,,,


                                                    राजेश कोंडल

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