काश ! अगर मै एक पेड़ होता ,,,,,
न चलता , न फिरता
न कुछ पाने की चाह में
इधर उधर भटकता
दिन भर खेलता हवाओ संग
रात भर पक्षियों के साथ
गहरी नींद सोता,,,,,,
काश ! अगर मै एक पेड़ होता ,,,,,
कोयल मेरी छाया मे बैठ क़ूह - क़ूह करती
कभी कोई गिलहरी मेरे बदन पर गुदगुदी
करती
पाने को मेरे मीठे फल,कोई अपने आंगन मे
मेरा बीज बोता,,,,काश ! अगर मै एक पेड़ होता ,,,,,
पक्षी बनाते अपने घोसले मेरी बाहों पर
लगाते लोग मुझे छाया के लिए राहों पर
सुनता मै सभी की मगर किसी से कुछ न कहता
फिर भी गर कोई कiटता मुझे ,,,,,,,
तब शायद मै भी रोताकाश ! अगर मै एक पेड़ होता ,,,,,
राजेश कोंडल
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