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| written by : Rajesh kondal |
जिंदगी कुछ नहीं बस दोड़ धुप है १०
हर इक आइय्ने में इसका नया रूप है,,,,,,,
रोती आँखों से देखो तो मायुश सी लगाती है
हस्ती आँखों से देखो तो हस्ती हुई लगाती है
हर इक पहलु मे इसकी अदा बड़ी खूब है,,,,,,,
खामोश रास्तो पे जाने किसे तलाशती है
कोन है इसका जिसे ये हर दम पूकारती है
जीवन है मेरा इसका हम सफ़र
ये उसमे बसी एक रूह है………
राजेश कोंडल

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