सरद मोसम में जैसे धूप अच्छी लगती है उसके मुख से निकली हर बात सची लगाती है उससे दिल का रिश्ता मे जोडू कैसे रिश्ते नातो की मुझे डोर काची लगाती है उसकी नज़रो से ये दुनिया देखू तो ये दुनिया बड़ी अच्छी लगाती है मेरी बातो पे बिश्वाश मत करना दोस्त कभी झूठी कभी सची लगाती है
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