
मै पत्थर हू ,,,,
पिघलना मेरी फिदरत नहीं
तरसो गे गर मुझे
तो बदल दुगा मै किस्मत तुम्हारी
मगर तरासने की किसी में हीमत नहीं,,,
मै पत्थर हु,,,,,
किसी ने तराश कर मुझे खुदा बना दिया
किसी ने तराश कर पैरो तले बिछा दिया
बनाना चाहता हु मै धड़कता हुआ दिल
मगर सीने में पत्थर लगाना कुदरत नहीं,,,
मै पत्थर हु,,,,,
कभी नदिया की धारा में बहता चला गया
कभी रस्ते में ठोकरे खता चला गया
कभी सोचा दफ़न हो जाऊ धरती क़ सीने मै
मगर कोन दफ्नायेगा मुझे
मेरे पास दफ़न होने की भी फुर्सत नहीं
मै पत्थर हू,,,,
राजेश कोंडल
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