ए शहर ,,,,,,,,,,,,
ए शहर तेरी कैसी है ये शान
पैसो में बिकता है यह इन्सान
इक तरफ बो गाव जहा सब इक दूजे पे मरते है
एक तरफ ये शहर जहा बिकता है इमान
एक तरफ बो गाव जहा सब चेन की नींद सोते है
एक तरफ ये शहर जहा खतरे में है जान
एक तरफ बो गाव जो रिश्तो से जाना जाता है
इक तरफ ये शहर जिसकी कोई न पहचान,,,,,
राजेश कोंडल
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