जब हर दिल में है रब बस्ता
होने को फिर क्या नहीं हो सकता
दिल मे अगर चाह हो मंजिल की
फिर खुद ब खुद बनता जाये रास्ता
पा सका न कोई खुदा को दोलत से
पर प्यार के मौल में मिले सस्ता
रोते हुओके जो आंसू पोंछेगा
बो ही जग छोड़ेगा हँसता हँसता
तू है करता तू ही उसे भरता ए बन्दे
फिर क्यों फिरे तू दर दर भटका भटका…
राजेश कोंडल
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