
सारा शहर रोशनी में नहायेगा
कोना कोना फिर जगमगायेगा
आकाश होगा रोशन इतना
सागर में है पानी जितना
धरती कुछ एसे सज़ेगी
नयी नवेली दुल्हन सी लगेगी
हर कही लगेगे बाज़ार
खरीदारी होगी बेशुमार
मिठाइयो का भी होगा जोर
प्ताखो का भी होगा शोर
रात फुल्झाडिया लिए हाथो में
बच्हो की निकलेगी बारात
तब हर कोई बस यही कहेगा
मुबारक हो दीपावली की र1त………………।
राजेश कोंडल
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