Thursday, October 28, 2010

रजा,,,,,,,,


written by : Rajesh kondal

प्यार की कोई उम्र, कोई बझा नहीं होती,,
इक तरफा प्यार से बड़कर कोई सजा नहीं होती
प्यार रूहानी हो अगर, ऐ मेरे दोस्त ,,,,,,,
इस से बड़ कर कोई फिर रजा नहीं होती ,,,,


राजेश कोंडल

No comments: