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| written by : Rajesh kondal |
चुल्हे कम दिल
अक्सर जलते है यहाँ
शराब के नशे में गिरते है
गिर कर कम ही सभालते है यहाँ
इस महखाने ने मुझे इतना बुरा बना दिया
मेरा नाम भी लेने से डरते है यहाँ………
किसी ने बजारू
किसी ने बेकाऊ कहा मुझे
इजत क्या होती है
सब ने बेअब्रू कहा मुझे
कैसे गुजारू गी अब मै ये जिन्दगी
हर पल, हर दिन जान पे बनते है यहाँ…………
हर दिन सजना ,हर दिन सवरना
मगर किस के लिए
दिन में न चैन रात भर जगना
मगर किस के लिए
खूब बजती है शेहनाई रात भर
सुबह उठती है अर्थी अरमा मरते है यहाँ………
राजेश कोंडल

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