Saturday, May 22, 2010

स्वतंत्रता

स्वतंत्रता मिली थी बलिदानों से
न मिली थी तीर या कमानों ने
भगत सिंह ,सुख देव और राज गुरु ने
जब फंसी के फंदे चूमे
तब वो आजादी के नशे में झूमे
आजादी की ये जागीर हम को
मिली है इनके कुर्वानो  से …………………..


बो बच्चे बूड़े और जवान
उनके भी थे कुछ अरमान
देश की खातिर फिर भी उन्होंने
इक पल मे दे दी अपनी जन
तब जा कर कही तिरंगा लहराया असमान
आजादी का क्या मोल रहा होगा तब
जरा पूछो वीर जवानो से………………

आजादी की जब आग जली
तब लकड़ी शहीदों की बनी
गूंज उठा तब अम्बर चीखो से
और धरती थी खून से सनी
फिर भी अहिंसा के आगे छाती वीरो की तानी
क्या पाया उस अग में जल कर
जरा पूछो उन परवानो से…
स्वतंत्रता मिली थी बलिदानों से…………………

                                                   राजेश कोंडल 

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