
जीवन का रहस्य जानने को
मै जा बैठा शमशान घाटी
जल ,वायु,अग्नि देखी
ये कैसा देखा तेरा रूप माटी....
जिस्म मिल गया अगनी में
आत्मा मिल गई वायु में
और मिल गई अस्तिय जल में
जिनकी ये अमानत थी
उन्होंने ले ली एक पल में
जो चला गया वो कहा गया
कोई ये जाने न
या आकार खड़ा है पास तुम्हारे
कोई उसे पहचाने न
कहना चाहता है वो हम से
मगर कुछ कह पता नहीं
जान गया है वो जीवन का रहस्य
मगर हमे बता पता नहीं
ये चक्र यु ही चलता रहेगा
कोई इसे रोक न पायेगा
इसी जगह आकार कल कोई
फिर से ये दोहराए गा
जीवन का रहस्य जीते जी
कोई न समाज पायेगा……………
राजेश कोंडल
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