Saturday, May 22, 2010

ए चाँद


ए चाँद तेरी खामोशिया
मुझ को देती है सदाएं
मै जब भी कभी उदास होता हूँ
तेरी चांदनी मुझको हंसी दे जाये...

काली अँधेरी रात मे
चमकता हुआ एक नूर है तू
मेरी आँखों से दिल मे उतरने वाला
कोई खुदाया सरूर है तू
तुमे देख कर जी भर लेता हूँ
मै तुमे गले लगा नहीं सकता
क्या करू बया मै तेरी सादगी
लफ्जो में सब बता नहीं सकता
सुवह से शाम तक की जुदाई
कभी कभी सही जाती नहीं
जुबां मेरी इसलिया खामोश है
ये बाते सबसे कही जाती नहीं
पेड़ो की आड़ से तेरा बो झाँकना
कभी खिड़की से मेरा कमरे में ताकना
कभी बदलो की ओड लेना चादर
फिर चुपके से देखना
मुझे अच्छा लगता है
कलम उठा आज सब लिख दिया मैंने
शायद कोई इस प्यार को समझ पाए
ऐ  चाँद तेरी खामोशिय
मुझ को देती है सदाए……….

राजेश कोंडल …………….

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