
मै सदा हस्त रही
मगर जिन्दगी उदास थी
मेरी आँखों मैं न आये आंसू कभी
मगर जिन्दगी मे प्यास थी
मेरी मंजिल की राहों मे
ये मेरी हम सफ़र थी
मै जहा भी गयी
ये मेरी रह गुजर थी
मगर!
एक दिन अचानक सामने अ खड़ी
कुछ न बोली ……….
बस चुप रही…….
उसकी आँखों मैं अगर थी नमी
हाँ! साथ मे कुछ लाई थी
शायद कही से माग कर ली थी
झहट से थमाकर चली गयी
जब देखा तो मौत लाई थी
मौत! हाँ मेरी मौत!
शायद मै ही न समज सकी
उसे किस की तलाश थी…………..
राजेश कौंडल
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