Tuesday, September 8, 2009

पलकों की छाव मे...................


written by : Rajesh kondal

पलकों की छाव मे
नींद के गाव मे
रत भर हम
खाब खाब खेलते रहे…………
खाब कुछ अनकहे से थे
खाब कुछ अनसुने से थे
फुल्लो की तरह महके से खाब
रत भर महकते रहे…………..
न जाने कहा से आये थे
न जाने कहा चले गए
फिर सब धुदला सा हो गया
हम जागते ,सोते रहे…………


"राजेश कोंडल "


1 comment:

rajeshkondal said...
This comment has been removed by the author.