Saturday, August 22, 2009

तेरे दर से………

written by : Rajesh kondal


तुमसे होकर इस कदर रूबरू निकले
आज तेरे दर से बरे बे-अबरू निकले

पानी मे चाँद नज़र आया रत इतना करीब
जब छूना चाह,तब बहुत दूर निकले

जिसने कतल कर दिया हमारी हर आरजू का
बोही हमारे बयाँ पर, बेकसूर निकले

हमने तो लिख दिया अपना हाले- दिल
उम्मीद है तुमसे, कोई दुआ जरुर निकले


राजेश कोंडल

1 comment:

Unknown said...

very good keep it up