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| written by : Rajesh kondal |
तुमसे होकर इस कदर रूबरू निकले
आज तेरे दर से बरे बे-अबरू निकले
पानी मे चाँद नज़र आया रत इतना करीब
जब छूना चाह,तब बहुत दूर निकले
जिसने कतल कर दिया हमारी हर आरजू का
बोही हमारे बयाँ पर, बेकसूर निकले
हमने तो लिख दिया अपना हाले- दिल
उम्मीद है तुमसे, कोई दुआ जरुर निकले
राजेश कोंडल

1 comment:
very good keep it up
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