Wednesday, August 26, 2009

सकून्............................

written by : Rajesh kondal

सकूं मुझे मिला आकार तेरी बहो मे
मंजिल मुझे मिली आकार तेरी रहो मे
मे तनहा था जिन्दगी के काफिले मे
मुझे पुकारा है अज तुम्हारी सदो ने............

देखा मैंने जब तुमको
बस देखता ही रह गया
तेरा मासूम चेहरा
पानी पे जैसे चाँद हो ठहरा!
आँखों का काजल रात बन बह गया!
डूब गए हम के उबार नहीं पाए
तेरी झील सी गहरी निगाहों मे
सकूं मुझे मिला………..

पता नहीं था इस कदर
हम भी कही खो जायेगे
ज़र्रा ज़र्रा कतरा कतरा
इस इश्क मे बहते जायेगे!
क्या खो देंगे और क्या पायेगे!
प्यार क्या है जाना हमने
आकार तेरी पनाहों मे……...

"राजेश कोंडल "

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