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| written by : Rajesh kondal |
सकूं मुझे मिला आकार तेरी बहो मे
मंजिल मुझे मिली आकार तेरी रहो मे
मे तनहा था जिन्दगी के काफिले मे
मुझे पुकारा है अज तुम्हारी सदो ने............
देखा मैंने जब तुमको
बस देखता ही रह गया
तेरा मासूम चेहरा
पानी पे जैसे चाँद हो ठहरा!
आँखों का काजल रात बन बह गया!
डूब गए हम के उबार नहीं पाए
तेरी झील सी गहरी निगाहों मे
सकूं मुझे मिला………..
पता नहीं था इस कदर
हम भी कही खो जायेगे
ज़र्रा ज़र्रा कतरा कतरा
इस इश्क मे बहते जायेगे!
क्या खो देंगे और क्या पायेगे!
प्यार क्या है जाना हमने
आकार तेरी पनाहों मे……...
"राजेश कोंडल "

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