Wednesday, August 26, 2009

मिलना मिलाना भूल गए……….

ख़ुद से मिलना मिलाना भूल गए
लोग जीने का बहाना भूल गए

हर कही जुल्म है, मोत के अंधेरे है
लोग रोशनी जलाना भूल गए……

वस् हाथ से हाथ मिलाता है हर कोई
लोग गले लगाना भूल गए………..

वो खंजर जिससे कतल हुआ मानवता का
लोग उसको छुपाना भूल गए………


"राजेश कोंडल "

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