
बदल यहाँ जमी पर रहते है
कदमो के निशा रास्तो पर बहते है
घुल जाती है सांसो में फिजाओ की खुशबु
तन बदन सब सिले सिले रहते है…….
बदल यहाँ जमी पर रहते है………………..
बरसा जाता है बुँदे, कोई बिन बताये युही
तरसा जाता है कभी कोई दूर रह कर युही
आते रहते है जाते रहते है खगो की तरह
यहाँ अक्सर येही सिनसिले रहते है……………..
बदल यहाँ जमी पर रहते है………………..
कोन सा रंग किस रंग में मिल जाए क्या पता
कब कोन सा मोसम कहा से आये क्या पता
अक्सर ये पहचने नही जाते इन आँखों से
रंग और मोसम यहाँ गुले मिले रहते है........
राजेश कोंडल
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